
नारायणपुर में धर्मांतरण मुद्दा गरमाया, सर्व समाज की खुली चेतावनी, उमड़ा जनसैलाब

सूरज सरकार, ब्यूरो चीफ, बस्तर संभाग
नारायणपुर: जिले में धर्मांतरण के मुद्दे ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। धर्म स्वतंत्रता विधेयक के समर्थन में आयोजित विशाल सभा में हजारों की संख्या में ग्रामीण और सर्व समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान आदिवासी समाज सहित विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर धर्मांतरण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
सभा में दूर-दराज के गांवों से पहुंचे पारंपरिक प्रतिनिधि—गायता, पुजारी, मांझी, चालकी, कोटवार और सिरहा—की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम की अगुवाई सर्व समाज के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पदाधिकारियों ने की।

धर्मांतरण पर गहरी चिंता
वक्ताओं ने जिले में लगातार सामने आ रहे धर्मांतरण के मामलों पर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना था कि इससे आदिवासी समाज की परंपराएं, संस्कृति और सामाजिक संरचना प्रभावित हो रही है, जिससे आपसी सौहार्द्र में दरार पैदा हो रही है। उन्होंने धर्म स्वतंत्रता विधेयक को इस समस्या से निपटने का प्रभावी माध्यम बताया।

मूल धर्म में लौटने की अपील
सभा के दौरान मंच से धर्मांतरित लोगों से अपने मूल धर्म में लौटने की अपील भी की गई। हाल ही में छोटे डोंगर में हुई बैठक का हवाला देते हुए बताया गया कि ऐसे लोगों को 30 अप्रैल तक का समय दिया गया है।


“आंदोलन किसी धर्म के खिलाफ नहीं”
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी धर्म विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि आदिवासी रीति-रिवाजों के विरुद्ध किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मिशनरियों पर सवाल
सभा में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों पर भी सवाल उठाए गए। आरोप लगाया गया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और इलाज के नाम पर लोगों को प्रभावित कर धर्मांतरण कराया जा रहा है। वहीं प्रशासन द्वारा धर्मांतरण की घटनाओं से इनकार किए जाने पर भी वक्ताओं ने सवाल खड़े किए।

मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया
सभा के बाद एक विशाल रैली निकाली गई और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में अवैध धर्मांतरण पर रोक, प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्मांतरण कराने वालों पर कड़ी कार्रवाई, तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग में धर्मांतरण करने वालों की डी-लिस्टिंग जैसी मांगें शामिल रहीं।



आगे बढ़ सकता है आंदोलन
सभा में शामिल प्रतिनिधियों ने संकेत दिया कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस घटनाक्रम से साफ है कि नारायणपुर में धर्मांतरण का मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन चुका है, जो प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
















