
एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन ने पुलिस व प्रशासन के सहयोग से बच्चों को कराया बाल मजदूरी एवं हो रहे शोषण से मुक्त
सूरज सरकार, प्रधान संपादक, न्यूज बस्तर की आवाज़
नारायणपुर 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर समर्पित संस्था नारायणपुर एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन ने पुलिस व प्रशासन के सहयोग से बच्चों को कराया बाल मजदूरी से मुक्त जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे संगठन समर्पित संस्था नारायणपुर एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन ने श्रम निषेध दिवस के मौके पर पुलिस व प्रशासन के सहयोग से बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया। यह कार्रवाई राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों की ओर से जून को बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई माह या ‘एक्शन मंथ’ के रूप में मनाने के बाबत जारी अधिसूचना व निर्देशों के तहत की गई। इन निर्देशों में बाल मजदूरी की शिकायत वाले इलाकों में छानबीन करने व बच्चों को मुक्त कराने के लिए साझा अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। समर्पित संस्था नारायणपुर एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन ने जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ जनजागरूकता अभियान भी चलाए जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अफसरों, सामुदायिक नेताओं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।

जस्टिस फॉर चिल्ड्रन बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के
लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के
सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का
सहयोगी संगठन है।

मुक्त कराए गए बच्चों की उम्र 8-17 साल के बीच है और ये कई वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में पिछले कुछ महीने से काम कर रहे थे। शुरुआती जांच से पता चला है कि इनसे बेहद अमानवीय और शोषणकारी स्थितियों में काम लिया जा रहा था। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्थितियों में मामूली पैसे पर इन्हें दिन रात बाल श्रमिकों का शोषण किया जा रहा था जिससे इनकी सेहत व मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था। बच्चों को मुक्त कराने के बाद जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है और पीड़ित बच्चों को पुनर्वास, मुआवजा व अन्य सुविधाएं दिलाने की प्रक्रिया जारी है जिसके वे अधिकार हैं।

जून महीने को बाल श्रम के खिलाफ ‘एक्शन मंथ’ के तौर पर मनाया जाता है और चूंकि बाल दुर्व्यापार यानी बच्चों की
ट्रैफिकिंग बाल मजदूरी का मुख्य कारण है, इसलिए नागरिक
समाज संगठन इस दौरान पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर
दुर्व्यापारियों और उनके गठजोड़ की शिनाख्त के लिए कड़ी
नजर रखते हैं।


इस मौके पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों और जिला
प्रशासन को हरसंभव सहयोग का वादा करते हुए एक्सेस टू
जस्टिस फॉर चिल्ड्रन निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने कहा, “शोषण
व मजदूरी से मुक्त कराए गए हर बच्चे के शिक्षा के अधिकार,
सुरक्षा व गरिमा की आज एक बार फिर बहाली हुई है। बाल
श्रम बच्चों को उनके बचपन और मूल अधिकारों से महरूम कर
देता है, लिहाजा इस समस्या से तत्काल निपटने की जरूरत है।
बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं बल्कि स्कूल में है।
चूंकि ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी आपसे में गहरे तक जुड़े हैं,
हम ट्रैफिकिंग की रोकथाम, बच्चों को मुक्त कराने के लिए जिला
प्रशासन प्रशासन व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी
समन्वय के साथ काम करते रहेंगे। साथ ही, हम सुनिश्चित करेंगे
कि हर बच्चे की देखभाल हो, समुचित पुनर्वास हो और उसे वो
सभी सुविधाएं मिलें जिसका वह हकदार है।”

इस नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत इसका साझा निगरानी तंत्र
और आपसी सहयोग है | जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के देश भर
में फैले सहयोगी संगठन एक दूसरे की आंख-कान का काम
करते हैं और आपस में सूचनाएं साझा करने के साथ ट्रैफिकिंग
के मामलों की निगरानी करते हैं। नेटवर्क के खुफिया सूचना-
साझाकरण तंत्र ने देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रैफिकिंग के शिकार
बच्चों की पहचान करने, उनका पता लगाने और उन्हें मुक्त
कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नतीजे में अप्रैल 2023
से मार्च 2026 के बीच 1.45 लाख से अधिक बच्चों को
ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया। इनमें अधिकांश मामले ऐसे थे,
जिनमें बच्चों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें बाल श्रम करने के लिए
मजबूर किया गया था।

















