अबूझमाड़ (बस्तर) के किसानों के लिए औषधि और सुगंधित पौधों की खेती का एक्सपोजर विजिट सह प्रशिक्षण 02 मई 2026 को बोर्ड द्वारा आयोजित किया गया।

नक्सल आतंक से मुक्त होने के पश्चात बस्तर के सर्वांगीण विकास एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु अबूझमाड़ वासियों को आजीविका के नए एवं उन्नत अवसर उपलब्ध कराने हेतु छत्तीसगढ़ शासन निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में 02 मई 2026 को नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ (बस्तर) क्षेत्र के कोहकामेटा, कुरुषनार, कंदाडी, किहकाड़, कोडोली, बासिंगबाहर गांव के 50 से अधिक आदिवासी कृषकों को औषधि पादप बोर्ड रायपुर द्वारा धमतरी जिले में बोर्ड के सहयोग से की जा रही औषधीय पौधों की खेती से रूबरू कराने हेतु अध्ययन प्रवास सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस अध्ययन प्रवास सह प्रशिक्षण में अबूझमाड़ के कृषकों ने धमतरी जिले में महिला स्व सहायता समूहो द्वारा बोर्ड के मार्गदर्शन एवं सहयोग से की जा रही औषधि पौधों खस, ब्राह्मी एवं बच की खेती का अवलोकन किया।

“नई सुबह की ओर” अभियान के अंतर्गत बोर्ड द्वारा बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों/जिलों के किसानों के लिए औषधि और सुगंधित पौधों की खेती तथा उनके अध्ययन प्रवास का आयोजन कराया जा रहा है, जिसके जरिए उनकी क्षमता विकास का लक्ष्य रखा गया है। बस्तर के किसानों को बाजार में अत्यधिक मांग वाली औषधि तथा सुगंधित पौधों की खेती के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त तथा सशक्तिकरण के नए साधन उपलब्ध कराना इस अभियान का उद्देश्य है।


“नई सुबह की ओर” अभियान के अंतर्गत बोर्ड द्वारा नारायणपुर जिले के किसानों को धमतरी के कंडेल गांव में बोर्ड के सहयोग से की जा रही ब्राह्मी की खेती का विजिट कराया गया, तथा ब्राह्मी की खेती का प्रशिक्षण भी दिया गया। इस अध्ययन प्रवास में किसानों को ब्राह्मी के खेत को तैयार कैसे करें, पौधों को कैसे रोपण करें, उनके लिए किस प्रकार की सिंचाई की आवश्यकता होती है, किस प्रकार के खाद ब्राह्मी की खेती में डाला जाना चाहिए और ब्राह्मी की खेती करने के बाद उसे कहां पर बेचा जा सकता है, इसके बारे में विस्तार से बोर्ड की ओर से धमतरी के जिला कंसल्टेंट फकीर चंद कोसरिया द्वारा जानकारी दी गई। ग्राम कंडेल में ब्राह्मी की खेती कर रहे महिला स्व सहायता समूह की सदस्य ने अबूझमाड़ (बस्तर) से आए सभी किसानों का स्वागत किया तथा उन्हें अपने अनुभव के बारे में बताया कि कैसे उन्होंने पारंपरिक धान की खेती के बदले खस, ब्राह्मी और बच की खेती प्रारंभ की और उनके इस निर्णय से आज धान से होने वाले मुनाफे से दोगुना मुनाफा प्राप्त हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि खस, ब्राह्मी और बच की खेती में लागत कम होने के साथ बार-बार रोपाई की जरूरत नहीं होती, एक बार रोपाई के बाद 3 से 4 वर्षों तक इनकी उपज ली जा सकती है।
महिला स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती दुलारी ढीमर जोकि खस, ब्राह्मी और बच की खेती की मास्टर ट्रेनर के रूप में किसानों को प्रशिक्षण दे रही है, ने विस्तार से इनकी खेती के बारे में जानकारी किसानों के समूह को दी।

अध्ययन प्रवास के अगले चरण में किसानों को ग्राम मगरलोड में खस की खेती का विजिट कराया गया, यहां पर किसानों को जानकारी दी गई कि खस की मांग बाजार में अत्यधिक है, तथा उसे नदियों के किनारे एवं जंगली नालों के किनारे भी आसानी से लगाया जा सकता है। किसानों को जानकारी दी कि धमतरी के इस मॉडल को बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों में नदियों के किनारे तथा नालों के किनारे पर आसानी से लगाकर लाभ कमाया जा सकता है। किसानों को यह जानकारी भी दी गई कि इसका प्रशिक्षण एवं पौधे भी बोर्ड की तरफ से निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। औषधि और सुगंधित पौधों की खेती शुरू करने के लिए निवेशकों से अनुबंध कराकर अग्रिम राशि प्रदान कर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।

इस अध्ययन प्रवास से अबूझमाड़ के वे कृषक जो अब तक विकास की मुख्यधारा से दूर थे, अब औषधि पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित हुए एवं शीघ्र ही अपने खेतों में इन औषधि पौधों की खेती प्रारंभ करने हेतु उत्साहित हैं।


बोर्ड के सीईओ श्री जे.ए.सी.एस. राव ने यह जानकारी दी कि बोर्ड द्वारा बस्तर के सभी जिलों के किसानों को औषधि और सुगंधित पौधों की खेती के लिए अध्ययन प्रवास तथा प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त किया जाएगा तथा खेती के जरिए दो से तीन गुना तक की आय के साधन उपलब्ध कराने के लिए बोर्ड लगातार कार्य करता रहेगा, जिससे अबूझमाड़ क्षेत्र के किसान विकास की नई सुबह से रूबरू हो सके।










