दशकों से नक्सल हिंसा और भय के साये में रहे कोरसकोडो, हचेकोटी, आदनार, बोटेर, कुमनार, दिवालुर, गुंडेकोट, रेकापाल एवं रासमेटा गांवों में आजादी के बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया गया